न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः। यानेव हत्वा न जिजीविषामस्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः॥6॥
Translation (HI)
हम नहीं जानते कि हमारे लिए क्या अच्छा है—कि हम विजय प्राप्त करें या वे हम पर विजय प्राप्त करें। जिनको मारकर हम जीना नहीं चाहते, वे ही धृतराष्ट्र के पुत्र हमारे सामने खड़े हैं।
Life Lesson (HI)
कभी-कभी द्वंद्व के क्षणों में भी स्पष्ट निर्णय लेना कठिन हो जाता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता के अध्याय 2 की भावार्थ स्पष्ट होती है। यहाँ अर्जुन अपने मन में उभरे हुए संदेहों और द्वंद्वों के बारे में विचार कर रहे हैं। उन्हें युद्ध के बीच रहकर अपने भाई, शिक्षक और रिषि समुदाय के लोगों को मारने का दुःख है। इस श्लोक में अर्जुन कह रहे हैं कि उन्हें नहीं पता कि वे क्या करें, क्या सही है—क्या विजय प्राप्त करना ठीक है या अपने प्रियजनों को मारने से बचने के लिए युद्ध छोड़ देना ठीक है। यह एक कठिन स्थिति है जिसमें अर्जुन फंसे हुए हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि जीवन में कई बार हमें अनिच्छुक द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। समय के साथ, हमें सही और गलत के बीच अन्तर का समझ आता है, और हमें उसमें सही निर्णय लेना चाहिए। इस श्लोक के माध्यम से हमें यह भी समझने को मिलता है कि कभी-कभी हमें अपने दुःख और संदेहों को पहचानना और उनका समाधान खोजना होता है, जो हमें जीवन में सही मार्ग प्रशस्त करने में मदद कर सक