Bhagavad Gita • Chapter 4 • Verse 1

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Chapter 4 • Verse 1

Jnana–Karma Sannyasa Yoga

श्रीभगवानुवाच। इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्। विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्॥1॥
Translation (HI)
श्रीभगवान ने कहा: मैंने यह अविनाशी योग विवस्वान (सूर्य) को बताया, विवस्वान ने इसे मनु को बताया और मनु ने इसे इक्ष्वाकु को बताया।
Life Lesson (HI)
धर्म परंपरा से चलता है और उसका स्रोत दिव्य होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि उन्होंने इस अविनाशी योग को सूर्य को बताया था, जिसे सूर्य ने मनु को बताया और मनु ने इसे इक्ष्वाकु को बताया। इस श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ज्ञान और धर्म की परंपरा सदैव चलती रहती है और इसका स्रोत दिव्य और अनन्त होता है। यह श्लोक हमें धर्म की महत्वपूर्णता और गहराई को समझाता है और हमें यह भी दिखाता है कि धर्म की प्राप्ति के लिए गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व है।