Bhagavad Gita • Chapter 4 • Verse 2

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Chapter 4 • Verse 2

Jnana–Karma Sannyasa Yoga

एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः। स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप॥2॥
Translation (HI)
इस प्रकार परंपरा से प्राप्त यह योग राजर्षियों द्वारा जाना गया; परंतु काल के प्रभाव से यह योग पृथ्वी पर नष्ट हो गया।
Life Lesson (HI)
परंपरा का क्षय ज्ञान के लोप का कारण बनता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता का महत्वपूर्ण एक संदेश दिया गया है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि जो योग उनके पूर्वजों से आया है, उसे राजर्षियों ने जाना है। लेकिन काल के साथ उस योग का अध्ययन खो दिया गया है। इस श्लोक का महत्व यह है कि परंपराओं से प्राप्त ज्ञान का महत्व है। जब हमारी परंपराएँ और संस्कृति के मूल्यों को हम नष्ट करते हैं, तो हमारा ज्ञान और विचार भी कमजोर होता जाता है। इसका संदेश है कि हमें अपनी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और उससे सीखना चाहिए। यह हमें सबल और उज्ज्वल बनाए रखेगा।