राग, भय और क्रोध से रहित, मेरे में लीन, मेरे शरणागत, बहुत से लोग ज्ञानतप से पवित्र होकर मेरी भाव दशा को प्राप्त हुए हैं।
Life Lesson (HI)
भक्ति और ज्ञान से ही परम भाव की प्राप्ति संभव है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कह रहे हैं कि जो भक्त राग, भय और क्रोध से मुक्त हैं और मुझमें लगे हुए हैं, वे ज्ञान और तपस्या से पवित्र होकर मेरे भाव दशा को प्राप्त होते हैं। इस श्लोक में भगवान अपने भक्तों के गुणों का वर्णन कर रहे हैं और उन्हें उनके साधनों के माध्यम से अपने प्रेम में लीन होने की समर्थना कर रहे हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि भक्ति और ज्ञान हमें भगवान के प्रेम में लीन बनने में सहायक होते हैं। राग, भय और क्रोध से मुक्त होकर और उन्हें ज्ञान और तपस्या के माध्यम से नियंत्रित करके हम भगवान के प्रेम में उदासीन हो जाते हैं और उसके साथ एकात्म हो जाते हैं। इस तरह संयमित और पवित्र भाव से भगवान के प्रेम को पाने के लिए हमें ज्ञान और तपस्या का पालन करना चाहिए।