यद्यपि मैं अजन्मा और अविनाशी आत्मा हूँ, और समस्त जीवों का ईश्वर हूँ, फिर भी मैं अपनी प्रकृति को अधीन करके आत्ममाया से प्रकट होता हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर अपने नियम से परे होकर भी धर्म की रक्षा हेतु प्रकट होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने अद्वितीय स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे अजन्मा और अविनाशी आत्मा हैं, जिसका न जन्म होता है और न मरण। वे सम्पूर्ण भूतों के ईश्वर हैं, यानी समस्त सृष्टि का पालनहार और नियंत्रक। फिर भी, अपनी महामाया शक्ति से वे अपनी प्रकृति को आधीन करके भगवान के रूप में प्रकट होते हैं।
इस श्लोक का महत्व यह है कि भगवान का स्वरूप हमारे समझ से परे है, और उन्होंने अपनी महामाया से इस सृष्टि को संभाला है। हमें इससे यह सीख मिलती है कि हमें भगवान की अद्वितीयता को समझने की कोशिश करनी चाहिए और उनकी भक्ति में निष्ठा बनानी चाहिए। भगवान की इस अद्वितीय स्वरूप को समझकर हम भक्ति, श्रद्धा और समर्पण से उनकी आराधना कर सकते हैं।