जो काम और क्रोध से रहित हैं, जिन्होंने चित्त पर नियंत्रण पाया है, और आत्मा को जान लिया है — उनके लिए ब्रह्मनिरवान चारों ओर विद्यमान है।
Life Lesson (HI)
जब मन पर नियंत्रण होता है, तभी आत्मज्ञान संभव होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण यह बता रहे हैं कि वे योगी जिनका मन काम और क्रोध से रहित है, और जिन्होंने अपने मन को वश में किया है, उनके लिए ब्रह्मनिर्वाण (ब्रह्म का अटल स्थान) सर्वत्र विद्यमान होता है। इस श्लोक से हमें यह समझ मिलता है कि मन के वश में करके और काम-क्रोध से परे रहकर ही हम आत्मज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं। आत्मज्ञान ही हमें सच्ची शांति और ब्रह्म का साक्षात्कार कराता है।
श्लोक में यह शिक्षा दी गई है कि हमें अपने मन को नियंत्रित करना चाहिए और काम-क्रोध से दूर रहकर आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होना चाहिए। यह हमें यह बताता है कि आध्यात्मिक सफलता के लिए मन का नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण है और इसके बिना आत्मज्ञान का साधना संभव नहीं है।