शरीर, गर्दन और सिर को सीधा और स्थिर रखे, और अपनी दृष्टि को नासिका के अग्रभाग पर केंद्रित करे, इधर-उधर दृष्टि न डाले।
Life Lesson (HI)
शारीरिक स्थिरता मानसिक स्थिरता को जन्म देती है।
Commentary (HI)
यह श्लोक भगवद गीता के ध्यान योग की अहम शिक्षा है। इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से शारीरिक और मानसिक एकाग्रता की महत्वता को समझाते हैं। यहाँ उन्होंने शिक्षादाता के रूप में सम्पूर्ण शरीर को सजीव बताया है।
इस श्लोक में ध्यान की विधि का वर्णन किया गया है। यहाँ शरीर, गर्दन और सिर को सीधा और स्थिर रखने का उपदेश दिया गया है, जिससे शरीर की स्थिरता एवं साधना की अधिक सम्भावना होती है। इसके साथ ही अपनी दृष्टि को नासिका के अग्रभाग पर केंद्रित करके मन को नियंत्रित रखने का उपदेश दिया गया है। इससे जीवन में अध्यात्मिक उन्नति और समृद्धि के लिए मानसिक संयम और एकाग्रता का महत्व जागृत होता है।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि शारीरिक स्थिरता मानसिक स्थिरता को जन्म देती है। ध्यान योग के माध्यम से इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए समय-समय पर अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अपने शरीर और मन को वश में