लेकिन अल्पबुद्धि वाले लोगों को वह फल नाशवान होता है। देवताओं को पूजने वाले देवताओं को जाते हैं, परंतु मेरे भक्त मुझे प्राप्त होते हैं।
Life Lesson (HI)
स्थायी फल ईश्वर की भक्ति से ही प्राप्त होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो लोग अल्पबुद्धि या अज्ञानी होते हैं, उन्हें प्राप्त फल में अन्त का अनुभव होता है। उन्हें वह फल नष्ट हो जाता है, अर्थात् वे उसका आनंद या फल शांति स्थायी नहीं होता। जिन व्यक्तियों को देवताओं की पूजा करने में रुचि होती है, वे देवताओं के लोक में पहुंचते हैं, उनका अर्थात् उन्हें वहाँ का सुख और समृद्धि मिलती है। परन्तु जो मुझे भक्ति से प्राप्त होते हैं, वे मुझमें प्राप्त होते हैं। अर्थात्, जो भक्ति और सेवा में लगे हैं, उन्हें ईश्वर की प्रेम और शांति की प्राप्ति होती है। यहाँ श्रीकृष्ण मानव जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत को समझाने के लिए भागवत गीता के माध्यम से बता रहे हैं कि शास्त्रों और धर्म के मार्ग का पालन करने से ही हमें स्थायी और निरंतर फल प्राप्त हो सकता है।