मैं योगमाया से आच्छादित होने के कारण सबको प्रकट नहीं होता — इसलिए यह मूढ़ जगत मुझे अजन्मा और अविनाशी नहीं जानता।
Life Lesson (HI)
ईश्वर केवल शुद्ध हृदय वालों को प्रकट होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण यह बता रहे हैं कि वे योगमाया से आवृत होने के कारण सभी लोगों को अपना प्रकट रूप नहीं दिखलाते हैं। इसलिए इस भ्रांतिमय जगत में लोग मुझे अजन्मा और अविनाशी नहीं समझते हैं।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि ईश्वर का प्रकट होना और उसकी पहचान केवल उन व्यक्तियों को होती है जिनके हृदय में शुद्धता और भक्ति होती है। अन्य लोग जो माया के भ्रांतिमय जाल में उलझे होते हैं, वे भगवान को सही रूप से नहीं समझ पाते।
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि भगवान का असली स्वरूप सिर्फ भक्ति और शुद्धता से ही प्रकट होता है और भक्ति के माध्यम से ही हम उनको सही तरीके से पहचान सकते हैं।