साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः। प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः॥30॥
Translation (HI)
जो मुझे अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ रूप में जानते हैं, वे मृत्यु के समय भी मुझको जानते हैं, उनके चित्त मुझसे एक हो चुके होते हैं।
Life Lesson (HI)
अंत समय में भी ईश्वर की स्मृति ही मोक्ष का द्वार है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण यहाँ बता रहे हैं कि जो भक्त मुझे सभी प्राणियों के अधिपति, दैवी शक्ति और यज्ञ के स्वरूप में जानते हैं, वे मृत्यु के समय में भी मुझे सच्ची भावना से पहचानते हैं और मुझसे एकीभाव होते हैं। इस भक्ति और समर्पण के साथ उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अंतिम समय में भी भगवान की स्मरण ही सच्चे मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता है।