जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये। ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम्॥29॥
Translation (HI)
जो लोग जरा और मृत्यु से मुक्त होना चाहते हैं, वे मेरी शरण लेकर ब्रह्म, अध्यात्म और सम्पूर्ण कर्म को जानते हैं।
Life Lesson (HI)
ईश्वर की शरण मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जो लोग जरा और मृत्यु से मुक्त होना चाहते हैं, वे मुझमें शरण लेकर भगवान को अपनाते हैं। वे जानते हैं कि ब्रह्म, अध्यात्म और सम्पूर्ण कर्म के द्वारा ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि ईश्वर की शरण लेने से हम मृत्यु के भय से मुक्ति पा सकते हैं। इसका अर्थ है कि अपने सभी कर्मों को भगवान के लिए समर्पित करके हम संसार से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अपने जीवन को भगवान के मार्ग पर चलाकर हम संसारिक बंधनों से मुक्ति पा सकते हैं।