अर्जुन ने कहा: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत क्या है और अधिदैव क्या कहलाता है?
Life Lesson (HI)
सच्चे जिज्ञासु की जिज्ञासा व्यापक और गहन होती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से पूछ रहे हैं कि उन्हें ये चार प्रमुख विषयों के विषय में जानकारी चाहिए है। पहला प्रश्न है - 'ब्रह्म' का अर्थ, जो सबका कारण है, क्या है? दूसरा प्रश्न है - 'अध्यात्म' जो आत्मा और उसका सम्बन्ध है, क्या है? तीसरा प्रश्न है - 'कर्म' जिससे हम अपने कर्मों के द्वारा अपने जीवन को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं। चौथा प्रश्न है - 'अधिभूत' और 'अधिदैव' के बारे में, जो भूतों और देवताओं की परम्परागत शक्तियों को संदर्भित करता है।
इस श्लोक में अर्जुन की जिज्ञासा और विशेषता दिखाई देती है। इससे हमें यह सिखाई जाती है कि हमें अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और उन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके माध्यम से हम अपने असंख्य शंखनिय चिंतन करने की क्षमता को विकसित कर सकते हैं और अंत में सार्थक और सुखमय जीवन जी सकते हैं।