यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान्। तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय॥6॥
Translation (HI)
जैसे आकाश में वायु सदैव स्थित रहती है, वैसे ही सभी प्राणी मुझमें स्थित हैं — ऐसा समझो।
Life Lesson (HI)
ईश्वर में ही सब कुछ स्थित है — वह सबका आधार हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को यह उपदेश दे रहे हैं कि वह सबका आधार एवं स्थिति हैं। जैसे आकाश में वायु सदैव स्थित रहती है, वैसे ही सभी प्राणी मुझमें स्थित हैं। यह उपमान के माध्यम से समझाया गया है कि जिस प्रकार वायु आकाश में स्थित है, वैसे ही समस्त भूत ईश्वर में स्थित हैं। ईश्वर ही सबकी उत्पत्ति, संरक्षण और समाप्ति का कारण हैं। इस श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें ईश्वर में अविचलित भरोसा रखना चाहिए और सबको एक ही देवता मानकर सम्मान देना चाहिए। यह हमें समता, भावना और सद्भावना की भावना सिखाता हैं।