Bhagavad Gita • Chapter 10 • Verse 1

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Chapter 10 • Verse 1

Vibhuti Yoga

श्रीभगवानुवाच। भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः। यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया॥1॥
Translation (HI)
श्रीभगवान ने कहा: हे महाबाहो! मेरे परम वचन को फिर से सुनो, जिसे मैं तुम्हारे प्रति प्रेम और हित की भावना से कह रहा हूँ।
Life Lesson (HI)
सच्चा गुरु हित की भावना से ही उपदेश देता है।
Commentary (HI)
श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन से कहा: "हे महाबाहो! फिर से मेरे परम वचन को सुनो, जिसे मैं तुम्हारे प्रति प्रेम और हित की भावना से कह रहा हूँ।" इस श्लोक में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से अपने उपदेश को फिर से सुनने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने यह उपदेश देने का कारण अर्जुन के प्रति प्रेम और हित की भावना है। गुरु का उपदेश समझने के लिए शिष्य को प्रेम और विश्वास की भावना रखनी चाहिए। गुरु के उपदेश को समझने में भक्ति और विश्वास की भावना बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, यह श्लोक हमें बताता है कि सच्चा गुरु हमें हित की भावना से ही उपदेश देता है और हमें उसे प्रेम से स्वीकारना चाहिए।