शस्त्रों में मैं वज्र (इंद्र का अस्त्र) हूँ, गायों में कामधेनु, संतति उत्पन्न करने वालों में कामदेव और सर्पों में वासुकि हूँ।
Life Lesson (HI)
सृजन और संहार दोनों में ईश्वर का वास है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान् श्रीकृष्ण अपने विभूतियों का वर्णन कर रहे हैं। वे कहते हैं कि वे शस्त्रों में वज्र, गायों में कामधेनु, संतति उत्पन्न करने वालों में कामदेव और सर्पों में वासुकि हैं। यह उनकी दिव्य विभूतियों का विवरण है जो सम्पूर्ण जगत् को धारण करने वाले ईश्वर के रूप हैं। यह श्लोक हमें यह बताता है कि सृष्टि और संहार के प्रक्रियाओं में भी ईश्वर का ही सामर्थ्य है। जैसे वज्र शस्त्र की ताकत को प्रतिनिधित्व करता है, उसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण भी सृष्टि और संहार की शक्ति को संभालते हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि समस्त सृष्टि में भगवान् का ही साक्षात्कार है और हमें उनकी परमात्मा स्वरूप की प्राप्ति के लिए उनकी भक्ति में लगना चाहिए।