उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम्। ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्॥27॥
Translation (HI)
घोड़ों में अमृत से उत्पन्न उच्चैःश्रवा, हाथियों में ऐरावत और मनुष्यों में राजा को जानो — वह मैं हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर उच्चतम गुणों और सत्ता के प्रतीक रूपों में प्रकट होते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्यता और महत्ता को स्पष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उच्चैःश्रवा घोड़ों में उत्पन्न होती है, ऐरावत हाथियों में और राजा मनुष्यों में। यहाँ भगवान अपने दिव्य स्वरूप को बताते हुए कह रहे हैं कि जैसे घोड़े की उच्चैःश्रवा, हाथी का ऐरावत और मनुष्य का राजा उनकी पहचान होती है, वैसे ही उन्हें भी इस प्रकार की पहचान की जानी चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण का यह उपमान उनके अद्वितीय स्वरूप, अध्यात्मिक शक्ति और महत्व को समझाने के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईश्वर उच्चतम गुणों और सत्ता के प्रतीक के रूप में प्रकट होते हैं और उन्हें समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ईश्वर का सच्चा स्वरूप अत्यंत महान और अमृत से उत्पन्न है, और हमें उसकी प्राप्ति के लिए समर्पित रहना चाहिए।