जैसे पतंगे प्रज्वलित अग्नि में नष्ट होने के लिए तेजी से उड़ते हैं, वैसे ही लोक भी आपकी प्रज्वलित मुखों में तेजी से विनाश के लिए जा रहे हैं।
Life Lesson (HI)
माया के प्रभाव में मानव स्वयं को नाश की ओर ले जाता है।
Commentary (HI)
यह श्लोक भगवद गीता के अध्याय 11 के श्लोक 29 का है। इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपनी विराट स्वरूप का दर्शन देते हैं और उन्हें यह बताते हैं कि जैसे पतंगे जलते हुए प्रदीप्त अग्नि में उड़ जाते हैं ताकि वे नष्ट हो जाएं, वैसे ही सभी लोग भी आपके प्रज्वलित मुख की ओर तेजी से नष्ट हो रहे हैं। यह श्लोक मानव जीवन में माया के प्रभाव से हमें यह समझाता है कि हमें आत्म-संयम और भगवत्प्राप्ति के लिए अपने मन, वाणी और शरीर का नियंत्रण करना आवश्यक है। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि हमें माया के वश में नहीं रहना चाहिए और अपनी आत्मा की उच्चतम शक्ति को पहचानना चाहिए।