हे अच्युत! आपने मेरे साथ जो भी खेल, भोजन, विश्राम आदि में भाग लिया — वहाँ जो मैंने उपेक्षा की, उसका मैं क्षमायाचक हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर के साथ संबंध मधुर हो सकते हैं, पर सम्मान बना रहना चाहिए।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि जब भी उसने उनके साथ भोजन, खेल, विश्राम आदि में भाग लिया, तो भगवान उसके उपेक्षा करने का क्षमायाचक हैं। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि हमें ईश्वर के साथ संबंध में मधुरता और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। भगवान हमारे साथ हमेशा उपेक्षा नहीं करते हैं और हमें भी उनके साथ संबंध में सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। इसके माध्यम से हमें यह समझने को मिलता है कि ईश्वर के साथ संबंध में सम्मान और प्रेम से जुड़कर हमारे जीवन को समृद्धि और शांति मिलती है।