सञ्जय उवाच। इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः। आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा॥50॥
Translation (HI)
संजय ने कहा: इस प्रकार कहकर वासुदेव ने अर्जुन को अपना सौम्य रूप दिखाया और भयभीत अर्जुन को आश्वस्त किया।
Life Lesson (HI)
ईश्वर दयालु हैं — वह अपने भक्त की स्थिति समझते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में, संजय अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद का वर्णन कर रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना दिव्य सौम्य रूप दिखाकर उसे आश्वस्त किया। इस अनुभव से अर्जुन का भय दूर हुआ और उसने भगवान के महात्मा स्वरूप को पुनः देखा।
जीवन संदेश के रूप में, यह श्लोक हमें यह बताता है कि ईश्वर हमें समझते हैं और हमारी स्थिति का ध्यान रखते हैं। भगवान हमारे भय को दूर करने और हमें आश्वस्त करने के लिए हमेशा हाजिर हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि हमें भगवान पर विश्वास रखना चाहिए और उनकी कृपा में आत्म-विश्वास बनाए रखना चाहिए।