Bhagavad Gita • Chapter 13 • Verse 8

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Chapter 13 • Verse 8

Kshetra–Kshetrajna Vibhaga Yoga

अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्। आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः॥8॥
Translation (HI)
अहंकार रहित होना, दिखावा न करना, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरु की सेवा, शुद्धता, स्थिरता और आत्मसंयम —
Life Lesson (HI)
सच्चा ज्ञान आत्मशुद्धि और विनम्रता से शुरू होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उचित आचरण के गुणों का उपदेश दे रहे हैं। ये गुण एक व्यक्ति के चरित्र में सामाजिक सद्भावना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। 1. अमानित्व: यह गुण आत्मसम्मान और गर्व को त्यागने की क्षमता को संकेत करता है। व्यक्ति को अहंकार से दूर रहना चाहिए और सभी के प्रति सम्मान और नम्रता दिखानी चाहिए। 2. अदम्भित्व: यह गुण दिखावा और भेदभाव को त्यागने की क्षमता को सूचित करता है। व्यक्ति को सच्चाई और सरलता से जीना चाहिए। 3. अहिंसा: यह गुण हिंसा से दूर रहने की शक्ति को संकेत करता है। व्यक्ति को सभी प्राणियों के प्रति दया और सौहार्दपूर्ण भावना रखनी चाहिए। 4. क्षान्ति: यह गुण सहनशीलता और धैर्य को संकेत करता है। व्यक्ति को जीवन की प्रत्येक परिस्थिति को सहन करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। 5. आर्जव: यह गुण सरलता और ईमानदारी को संकेत करता है। व्यक्ति को अपने विचारों और कृतियों में