हे निष्पाप! सत्त्वगुण निर्मल होने से प्रकाशमान और रोगरहित होता है — यह सुख और ज्ञान के संबंध से आत्मा को बाँधता है।
Life Lesson (HI)
सत्त्वगुण भी सुख की इच्छा के कारण बंधन बन सकता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को सत्त्वगुण के विषय में बता रहे हैं। सत्त्वगुण निर्मलता का प्रतीक होता है, जिससे आत्मा का प्रकाशमान और रोगरहित होता है। यह गुण आत्मा को सुख और ज्ञान के संबंध में बाँध सकता है।
इस संदेश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सत्त्वगुण का संतुलन रखना महत्वपूर्ण है। यदि हम सुख की इच्छाओं में उलझ जाते हैं और ज्ञान से विचलित हो जाते हैं, तो हमारा आत्मा बंधन में आ सकता है। इसलिए, हमें स्वयं को संतुलित रखने के लिए सत्त्वगुण के साथ सहयोग करना चाहिए और सुख और ज्ञान के माध्यम से आत्मा को उचित दिशा में ले जाना चाहिए।