यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम्। स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत॥19॥
Translation (HI)
जो मुझ पुरुषोत्तम को भ्रमरहित होकर जानता है, वह सब कुछ जानने वाला है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर का सच्चा ज्ञान ही पूर्ण भक्ति को जन्म देता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने स्वरूप को समझकर उसकी सच्ची भक्ति प्रकट करने वाले पुरुष की महिमा वर्णित कर रहे हैं। जो व्यक्ति भगवान के पुरुषोत्तम स्वरूप को विचारपूर्वक समझता है, भ्रमरहित होकर, वह सब कुछ जानने वाला है और सम्पूर्ण भाव से भगवान की भक्ति करता है। एक सच्चे भक्त के लिए ईश्वर का साक्षात्कार ही सब से महत्वपूर्ण होता है और उसका जीवन सार्थक बन जाता है। इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि भगवान की सच्ची भक्ति के लिए उसके स्वरूप को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है और यही भक्ति का सच्चा मार्ग है।