Bhagavad Gita • Chapter 15 • Verse 20

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Chapter 15 • Verse 20

Purushottama Yoga

इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ। एतद्बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत॥20॥
Translation (HI)
हे निष्पाप! इस प्रकार यह अत्यंत गुप्त शास्त्र मैंने कहा — इसे जानकर मनुष्य बुद्धिमान होता है और अपना कर्तव्य पूर्ण करता है।
Life Lesson (HI)
यह ज्ञान जीवन की पूर्णता और मुक्ति का द्वार है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कह रहे हैं कि वे एक अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण शास्त्र बता रहे हैं। इस शास्त्र को समझकर मनुष्य बुद्धिमान बन जाता है और अपने कर्मों को सही दिशा में ले जाता है। यह ज्ञान जीवन की पूर्णता और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग है। इसका अर्थ है कि भगवद गीता जीवन को समझने और उसे सही दिशा में ले जाने के लिए मार्गदर्शन करती है। इसे पढ़कर व्यक्ति बुद्धिमान बनता है और अपने कर्तव्यों का पूर्णार्थ समझता है। इसलिए, भगवद गीता को समझना और उसके सिद्धांतों को अपनाना जीवन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।