सैकड़ों आशाओं में बंधे, वे काम और क्रोध के वश होकर अन्यायपूर्वक धन संचय करते हैं।
Life Lesson (HI)
अत्यधिक इच्छा और लालच अन्याय और अधर्म का मार्ग प्रशस्त करती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भागवत गीता में मनुष्यों के व्यवहार के कुछ सीखने योग्य पहलुओं को विवेचन कर रहे हैं। यहाँ वर्णित किया गया है कि जो लोग अत्यधिक आशा और बड़े भाग्य संबंधित बाधाओं में फंसे होते हैं, वे काम और क्रोध के वश में रहकर अन्यायपूर्वक धन का संचय करने के लिए प्रवृत्त होते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति अधर्मिक और अन्यायपूर्ण कार्य करते हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अत्यधिक इच्छाशक्ति और लालच व्यक्ति को अन्यायपूर्वक धन कमाने और संचय करने की दिशा में ले जाते हैं। इससे व्यक्ति अपने धर्म से भटक जाता है और अधर्म की ओर अपने कदम बढ़ाता है। इसलिए, यह श्लोक हमें यह बताता है कि हमें अत्यधिक इच्छाशक्ति और लालच से बचकर धर्मपरायण और न्यायप्रिय जीवन जीना चाहिए।