‘इस शत्रु को मैंने मार दिया, और दूसरों को भी मारूँगा; मैं ईश्वर हूँ, भोगी हूँ, सिद्ध हूँ, बलवान और सुखी हूँ।’
Life Lesson (HI)
अहंकार व्यक्ति को अंधकार में ले जाता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को यह बता रहे हैं कि एक व्यक्ति जब अहंकार में डूब जाता है, तो वह अपने आप को परमात्मा समझने लगता है। वह सोचता है कि उसने जो कुछ किया है, वह सब उसके बल, सिद्धि और सुख के कारण हुआ है। इस भ्रम में पड़ने से व्यक्ति उत्तम और नीच के भेद को भूल जाता है और अनात्मा को आत्मा समझने लगता है। अहंकार वाले व्यक्ति का मानसिक स्थिति कमजोर हो जाता है और वह अंधकार में डूब जाता है।
इस श्लोक से हमें यह सीखने को मिलता है कि अहंकार की अभिमानितता से बचना चाहिए और हमें समझना चाहिए कि हम भगवान की शक्ति, सुख और सिद्धि के कारण नहीं हैं। हमें आत्मनिर्भरता और समर्पण की भावना से जीना चाहिए, ताकि हम सच्चे सुख और शांति को प्राप्त कर सकें। इस श्लोक के माध्यम से हमें अहंकार के विपरीत निर्मलता और विवेक का मार्ग दिखाया गया है।