जिस ज्ञान से मनुष्य समस्त प्राणियों में एक ही अविनाशी आत्मा को अविभाजित रूप में देखता है — वह सात्त्विक ज्ञान है।
Life Lesson (HI)
सच्चा ज्ञान एकत्व को देखता है, भिन्नता को नहीं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि जो ज्ञान है जिससे मनुष्य सम्पूर्ण प्राणियों में एक अविनाशी आत्मा को अविभाजित रूप में देखता है, वह ज्ञान सात्विक है। इसका अर्थ है कि जो ज्ञान हमें समस्त प्राणियों के भीतर आत्मा की अद्वितीयता और अविनाशिता को समझने की क्षमता प्रदान करता है, वह ज्ञान सात्विक होता है।
इस श्लोक का महत्व यह है कि हम समस्त प्राणियों में एकता और अविनाशिता को देखें और भिन्नता को नहीं। यह हमें समस्त जीवों के साथ एक संवादात्मक संबंध बनाने की महत्वपूर्णता को समझाता है और हमें सभी प्राणियों के प्रति सम्मान और सहानुभूति व्यक्त करने की शिक्षा देता है। इस ज्ञान के माध्यम से हम समस्त सृष्टि में एकता और सहयोग के महत्व को समझ सकते हैं और अध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।