जो व्यक्ति रागी, कर्मफल की इच्छा करने वाला, लोभी, हिंसक, अशुद्ध, और हर्ष व शोक से प्रभावित रहता है — वह राजसिक कर्ता कहलाता है।
Life Lesson (HI)
भावनाओं से डगमगाने वाला व्यक्ति निर्णय में अस्थिर रहता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण विभिन्न प्रकार के राजसिक कर्मचारियों के गुणों का वर्णन कर रहे हैं। राजसिक कर्मचारी वह है जो अपनी कर्मों में रागी होता है, कर्मफल की इच्छा करता है, लालची होता है, हिंसात्मक विचारधारा अपनाता है, अशुद्धता में रहता है, सुख और दुःख से प्रभावित रहता है। इन गुणों से युक्त व्यक्ति निर्णय लेने में अस्थिर रहता है और उसके विचार और क्रियाएँ अनियमित होती हैं।
इस श्लोक का महत्व हमें यह सिखाता है कि अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना कितना महत्वपूर्ण है। राग, लोभ, हिंसा और अशुद्धता से युक्त होने से हमारा निर्णय और कार्य सही दिशा में नहीं जाते। हमें शांति, संतोष और स्वाध्याय के माध्यम से अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना चाहिए, ताकि हम सही निर्णय ले सकें और सच्चे धर्म का पालन कर सकें।