यदि तुम अपना चित्त मुझमें लगाओगे, तो मेरी कृपा से सभी कठिनाइयों को पार कर लोगे। परंतु यदि अहंकार से मेरी बात नहीं मानोगे, तो विनष्ट हो जाओगे।
Life Lesson (HI)
अहंकार के कारण मार्गदर्शन अस्वीकार करना विनाश का कारण है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि यदि वह अपना मन मुझमें लगाएगा, अर्थात् मेरे परमेश्वरीय स्वरूप में एकाग्र करेगा, तो मैं उसके द्वारा सभी कठिनाइयों को पार करवा दूँगा। लेकिन अगर वह अपने अहंकार से मेरी उपदेशों को न सुनेगा, तो वह अपने ही हानि की दिशा में जाएगा और नाश में ही लिपट जाएगा।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई गई है कि अहंकार से प्रेरित होकर हम अक्षम हो जाते हैं और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में विफल हो जाते हैं। इसलिए हमें अपने अहंकार को छोड़कर भगवान की शरण में जाना चाहिए ताकि हम सही मार्ग पर चल सकें और सभी कठिनाइयों का सामना कर सकें। इस श्लोक से हमें यह भी समझ मिलता है कि हमें गर्व और अहंकार को दूर करके हमेशा नम्र और समर्पित रहना चाहिए।