सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः। इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्॥64॥
Translation (HI)
अब पुनः सबसे गोपनीय वचन सुनो, क्योंकि तुम मुझे अत्यंत प्रिय हो, इसलिए मैं तुम्हारे हित की बात कहूंगा।
Life Lesson (HI)
भगवान भक्त को सदा शुभ ही परामर्श देते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि अब वे सबसे गोपनीय वचन सुनाएंगे। यह वचन उसके लिए विशेष है, क्योंकि भगवान उससे अत्यंत प्रिय हैं। भगवान कहते हैं कि उन्हें जो कुछ बताना है, वह अर्जुन के हित में होगा।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि भगवान हमेशा अपने भक्तों के हित में सच्चाई और उपदेश देते हैं। यह श्लोक हमें यह बताता है कि जब हम भगवान की भक्ति में लगे रहते हैं, तो हमें सच्चाई और उपदेश की प्राप्ति होती है जो हमारे भले के लिए होती है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि भगवान के मार्ग पर चलने से हमें सच्चाई और उपदेश की प्राप्ति होती है जो हमारे जीवन को सफल और सुखमय बनाती है।