Bhagavad Gita • Chapter 3 • Verse 11

Read the shloka, translation, commentary, and tags.

Chapter 3 • Verse 11

Karma Yoga

देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः। परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ॥11॥
Translation (HI)
इस यज्ञ द्वारा देवताओं को प्रसन्न करो और देवता तुम्हारी उन्नति करेंगे। इस परस्पर सहयोग से तुम परम कल्याण को प्राप्त करोगे।
Life Lesson (HI)
सहयोग से ही समाज और आत्मा का उत्थान संभव है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे देवताओं के लिए यज्ञ करें, जिससे देवताएं भी उनकी उन्नति करें। इस प्रकार, जब दोनों पक्ष सहयोग से मिलकर कार्य करेंगे, तो उन्हें परम कल्याण की प्राप्ति होगी। इस श्लोक में शिक्षा दी गई है कि सहयोग और एकता से ही समाज और आत्मा का उत्थान संभव है। जब हम अपने कर्तव्यों को सही तरीके से निभाते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, तो हमारे आसपास का समाज सुखी और समृद्ध होता है। इसलिए, सहयोग और समर्पण के माध्यम से ही हम अपने और दूसरों के उत्थान का मार्ग प्राप्त कर सकते हैं।