अर्जुन ने कहा: हे वार्ष्णेय! मनुष्य अनिच्छा होने पर भी बलात् पाप क्यों करता है?
Life Lesson (HI)
अवांछित कर्म का मूल कारण आंतरिक कमजोरी है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में अर्जुन भगवान कृष्ण से पूछ रहे हैं कि मनुष्य जब अपनी इच्छा से भी विरक्त होकर बलात्कारी और अधर्मी कार्य क्यों करता है। इसका अर्थ है कि अक्सर हमारी इच्छाओं या भावनाओं के विरुद्ध कार्य करने के पीछे हमारी कमजोरी और असंकल्पित विचार होते हैं। इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि हमें अपनी इच्छाओं और भावनाओं को संयमित रखना चाहिए ताकि हम जीवन में धर्मपरायण और सही कर्म कर सकें।