श्रीभगवानुवाच। काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥37॥
Translation (HI)
श्रीभगवान ने कहा: यह काम (वासना) और क्रोध है, जो रजोगुण से उत्पन्न होते हैं। ये बड़े भक्षक और महान पापी हैं; इन्हें यहाँ शत्रु जानो।
Life Lesson (HI)
वासना और क्रोध आत्मा के सबसे बड़े शत्रु हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि काम और क्रोध जो रजोगुण से उत्पन्न होते हैं, वे बड़े भक्षक और महान पापी हैं। यह दो गुण हमें भ्रमित कर बुरी दिशा में ले जा सकते हैं। इन गुणों का उद्भव हमारे मन की उत्कृष्टता को नष्ट कर सकता है और हमें दुःख में डाल सकता है। इसलिए हमें इन गुणों को समझना और उनका सामना करना आवश्यक है।
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि हमें अपनी वासनाओं और क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। ये मनुष्य के अच्छे भावनाओं और सच्चे स्वभाव को नष्ट कर सकते हैं। हमें इन गुणों को पहचानना और उनसे दूर रहने का प्रयास करना चाहिए ताकि हम आत्मा की ऊर्जा को नष्ट नहीं होने दें। इस रूप में, हमें अपने आत्मा के सबसे बड़े शत्रु काम और क्रोध को जानना चाहिए और उनसे लड़ना चाहिए।