जैसे धुएँ से अग्नि ढक जाती है, धूल से दर्पण और गर्भ से भ्रूण, वैसे ही यह ज्ञान कामना से आच्छादित हो जाता है।
Life Lesson (HI)
वासना ज्ञान पर आवरण डाल देती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अपने शिष्य अर्जुन को दृष्टांत द्वारा ज्ञान की महत्वपूर्णता बताते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे धुआं से आग ढक जाती है, धूल से दर्पण और गर्भ से भ्रूण, ठीक उसी तरह यह ज्ञान कामना से आवृत हो जाता है। जैसे धुआं, धूल और गर्भ नकारात्मक प्रभाव डालते हैं और सच्चाई को छिपा देते हैं, ठीक वैसे ही कामना और इच्छाएं हमें ज्ञान के असली रूप से वंचित कर देती हैं। इसलिए, हमें इन भावनाओं से मुक्त होकर ज्ञान की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ज्ञान की अहमियत क्या है और कैसे हमें अपनी कामनाओं और इच्छाओं के परे उच्च स्थिति को प्राप्त करने के लिए ज्ञान की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह हमें यह बताता है कि सच्चा ज्ञान हमें अपने असली स्वरूप को समझने में मदद करता है और हमें आत्मा की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होता है।