एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्थभ्यात्मानमात्मना। जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम्॥43॥
Translation (HI)
इस प्रकार बुद्धि से परे आत्मा को जानकर, आत्मा द्वारा मन को स्थिर कर, हे महाबाहो! तू इस कठिन दुष्प्राप्य कामरूपी शत्रु का नाश कर।
Life Lesson (HI)
आत्मबुद्धि से ही वासना का पूर्ण पराजय संभव है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि एक व्यक्ति को अपने आत्मा को समझने के बाद अपने मन को आत्मा द्वारा स्थिर करना चाहिए। इस तरह से, जब व्यक्ति अपने आत्मा को प्राप्त कर लेता है, तो उसे अपनी बुद्धि के माध्यम से अपने मन को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है। हे महाबाहो अर्जुन, इस प्रकार तू उस कठिन और दुरासाध्य कामरूपी शत्रु को नष्ट कर।
यहाँ श्रीकृष्ण बता रहे हैं कि मानव को अपनी आत्मा के माध्यम से अपने मन को नियंत्रित करना चाहिए। जब हम अपने आत्मा को समझते हैं, तो हमारी बुद्धि मन को नियंत्रित करने में सक्षम होती है और हम अपनी इच्छाओं और वासनाओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अपनी बुद्धि के माध्यम से अपने मन को नियंत्रित करना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है और कैसे हम अपने आत्मा को समझकर अपने अंतर्मन को शुद्ध कर सकते हैं।