Bhagavad Gita • Chapter 4 • Verse 4

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Chapter 4 • Verse 4

Jnana–Karma Sannyasa Yoga

अर्जुन उवाच। अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः। कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति॥4॥
Translation (HI)
अर्जुन ने कहा: आपका जन्म तो हाल में हुआ और विवस्वान का बहुत पहले; तो मैं यह कैसे समझूं कि आपने पहले यह योग कहा था?
Life Lesson (HI)
मानव बुद्धि को दिव्यता की अनादित्व को समझना कठिन होता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में अर्जुन श्रीकृष्ण से पूछ रहे हैं कि उनका जन्म तो हाल में हुआ है, जबकि भगवान विवस्वान का बहुत पहले हुआ था। इसलिए उन्हें यह समझने में कठिनाई हो रही है कि भगवान ने पहले कब यह योग कहा था। यहाँ अर्जुन की असमझ में एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है। यह संदेश है कि मानव बुद्धि को दिव्यता और अनादित्व की समझने में वास्तव में कठिनाई हो सकती है। हमारी सोच और दृष्टिकोण सीमित होते हैं और हम अक्षरशः अनंतता और अनादित्व की समझ में समर्थ नहीं होते हैं। इसलिए, हमें भगवद गीता जैसे ग्रंथों से दिव्यता की समझ को समझने की कोशिश करनी चाहिए।