सभी इच्छाओं को, जो संकल्प से उत्पन्न होती हैं, पूर्ण रूप से त्याग कर, मन द्वारा सभी इन्द्रियों को हर दिशा से नियंत्रित करना चाहिए।
Life Lesson (HI)
इच्छाओं पर नियंत्रण ही आत्मनियंत्रण की पहली सीढ़ी है।
Commentary (HI)
यह श्लोक भगवद गीता के चौबीसवें अध्याय में स्थित है। इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि इच्छाओं को संकल्प से उत्पन्न होने वाली सभी कामनाओं को पूर्णतः त्याग करना चाहिए। वह अपने मन द्वारा सभी इन्द्रियों को सम्पूर्ण नियंत्रण में रखकर उनका संयम बनाए रखना चाहिए। इससे हम अपने विचारों और क्रियाओं पर नियंत्रण पा सकते हैं और आत्मनियंत्रण की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
इस श्लोक में बताया गया महत्वपूर्ण संदेश है कि हमें अपनी इच्छाओं और कामनाओं पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। इच्छाओं का अनंत चलन हमें भ्रमित कर सकता है और हमें अपने उद्देश्यों से दूर ले जा सकता है। इसलिए, हमें मन की शक्ति का सही तरीके से उपयोग करके इन्द्रियों को नियंत्रित करना चाहिए ताकि हम अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें।
इस श्लोक का सारांश यह है कि अपने मन को नियंत्रित करके इच्छाओं पर नियंत्रण पाना हमारे आत्मनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।