योग से च्युत हुआ व्यक्ति पुण्यकर्मों से प्राप्त स्वर्गलोकों में यथोचित काल तक निवास करता है, फिर वह शुचि और समृद्ध परिवार में जन्म लेता है।
Life Lesson (HI)
योग का प्रयास व्यर्थ नहीं जाता — वह अगली जन्म की नींव बनता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण योग के माध्यम से अपनी ध्यान और उनके राज्य का वर्णन कर रहे हैं। यहाँ उन्होंने वर्णित किया है कि जो व्यक्ति योग के माध्यम से अपने कर्मों की साधना करता है, उसे पुण्यकर्मों से युक्त स्वर्गलोकों को प्राप्त होते हुए भी उसके काल तक निवास करने की अनुमति मिलती है। फिर ऐसा व्यक्ति शुचि और समृद्ध परिवार के घर में जन्म लेता है।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि योग का प्रयास कभी भी व्यर्थ नहीं जाता। योग के माध्यम से हम अपने उद्देश्यों की प्राप्ति की ओर बढ़ सकते हैं और अगले जन्म में भी एक सुखी और समृद्ध जीवन की नींव रख सकते हैं। इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि शुद्ध और सकारात्मक कर्मों के माध्यम से हम अपने भविष्य को सुधार सकते हैं और उच्च स्थानों तक पहुंच सकते हैं।