हे पार्थ! जानो कि मैं समस्त प्राणियों का सनातन बीज हूँ; मैं बुद्धिमानों की बुद्धि और तेजस्वियों का तेज हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर मूल कारण, चेतना और तेज का स्रोत हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे समस्त प्राणियों का सनातन बीज हैं। जिस तरह सभी पौधों और पेड़ों का वृक्ष बीज से ही उगता है, उसी प्रकार समस्त संजीव जीवों का भी मूल कारण ईश्वर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे बुद्धिमानों की बुद्धि और तेजस्वियों का तेज हैं। इसका अर्थ है कि सभी ज्ञानी और तेजस्वी व्यक्तियों का उद्दीपन और समर्थन ईश्वर ही करते हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ईश्वर सभी संजीव जीवों का मूल कारण हैं और उनका समर्थन करते हैं। हमें यह भी अनुभव करना चाहिए कि ऊपरवाला हमारे सभी बुद्धि और तेज का स्रोत हैं और हमें इस उच्च सत्ता के प्रति आभास होना चाहिए। इस प्रकार, इस श्लोक से हमें ईश्वर की महत्ता और हमारे उसके प्रति आभास की महत्ता का ज्ञान प्राप्त होता है।