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Bhagavad Gita
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Tag • intellect
gandiva, mind, burns, skin
Gitam
Bhagavad Gita
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gandiva, mind, burns, skin
13 verses
Chapter 1 • Verse 30
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गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते। न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः॥30॥
Chapter 3 • Verse 40
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इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते। एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्॥40॥
Chapter 7 • Verse 4
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भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च। अहंकार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा॥4॥
Chapter 7 • Verse 10
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बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्। बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्॥10॥
Chapter 9 • Verse 12
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मोगाशा मोगकर्माणो मोगज्ञानाः विचेतसः। राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः॥12॥
Chapter 12 • Verse 8
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मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय। निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः॥8॥
Chapter 13 • Verse 6
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महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च। इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः॥6॥
Chapter 18 • Verse 16
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तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः। पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः॥16॥
Chapter 18 • Verse 17
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यस्यानाहंकृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते। हत्वाऽपि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निबध्यते॥17॥
Chapter 18 • Verse 29
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बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतः त्रिविधं शृणु। प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय॥29॥
Chapter 18 • Verse 30
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प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्यमेव च। भयाभयं च बन्धं मोक्षं च या वेत्ति सा बुद्धिः सात्त्विकी॥30॥
Chapter 18 • Verse 32
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अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसावृता। सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी॥32॥
Chapter 18 • Verse 51
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बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्यात्मानं नियम्य च। शब्दादीन्विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च॥51॥