शुद्ध बुद्धि से युक्त होकर, धैर्य से आत्मा को संयमित कर, शब्द आदि विषयों को त्याग कर, और राग-द्वेष से मुक्त होकर…
Life Lesson (HI)
आत्म-संयम और राग-द्वेष का परित्याग ही आध्यात्मिक जीवन की नींव है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से ज्ञान को शुद्ध करके, धैर्य से अपने मन को नियंत्रित करने, शब्द और अन्य इंद्रियों के विषयों को त्याग करने, और राग-द्वेष को दूर करने की सलाह देते हैं। इसका अर्थ है कि आत्म-संयम और राग-द्वेष का त्याग करना ही आध्यात्मिक जीवन की मूल आधार है। यह श्लोक हमें यह बताता है कि हमें अपने मन, इंद्रियों और भावनाओं को नियंत्रित करना चाहिए और अपने अंतरात्मा के साथ संयम बनाए रखना चाहिए। इससे हम सच्चे आत्मा की पहचान कर सकते हैं और आत्मा के अद्वितीय स्वरूप को पहचानकर अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।