हे धनञ्जय! मुझसे परे कुछ भी नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत मुझमें मोतियों के समान सूत्र में गुंथा हुआ है।
Life Lesson (HI)
ईश्वर अदृश्य होते हुए भी सबको एक सूत्र में बाँधता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि उनके अतिरिक्त किसी और का भी अस्तित्व नहीं है। यह सम्पूर्ण जगत भगवान में ही समाहित है, जैसे मोतियों के सूत्र में गुँथा हुआ है। इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर सभी जीवों को एक ब्रह्माण्डिक सूत्र में जोड़ते हैं, जिससे हम सभी एक ही परमात्मा के अंश हैं और हम सभी उसी के भागी हैं। भगवान कहते हैं कि उनके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, और वे सम्पूर्ण विश्व के संरक्षक और संस्थापक हैं। इस श्लोक से हमें यह भी समझ मिलता है कि ईश्वर अदृश्य होते हुए भी हमें सब जीवों को भाई-बंधु के रूप में देखना चाहिए और संवाद के माध्यम से उनकी अद्भुतता और उच्चता का अनुभव करना चाहिए।