हे कौन्तेय! मैं जल में रस हूँ, चन्द्र और सूर्य में प्रकाश हूँ, वेदों में ॐकार हूँ, आकाश में शब्द हूँ और पुरुषों में पुरुषत्व हूँ।
Life Lesson (HI)
ईश्वर की उपस्थिति हर तत्व और गुण में है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे सभी वस्तुओं और गुणों में उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि वे जल में रस हैं, चन्द्र और सूर्य में प्रकाश हैं, वेदों में ॐकार हैं, आकाश में शब्द हैं और पुरुषों में पुरुषत्व हैं। इसका मतलब यह है कि भगवान की उपस्थिति हर जगह है और वे सभी तत्वों में सम्मिलित हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि ईश्वर अनंत और सर्वव्यापी हैं और उनका संबंध हर जीव और प्राणी से है। ईश्वर की उपस्थिति हर तत्व में है और वे हर वस्तु में विद्यमान हैं। इस श्लोक से हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हर व्यक्ति में ईश्वर का अंश है और हमें सभी में उनका सम्मान करना चाहिए।