प्रातःकाल में सभी प्राणी अव्यक्त से व्यक्त होते हैं और रात्रि के आगमन पर उसी अव्यक्त में लीन हो जाते हैं।
Life Lesson (HI)
संपूर्ण सृष्टि एक चक्र में जन्म और विलय पाती है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता का भव्य सिद्धांत व्यक्त होता है। यहाँ कहा गया है कि सभी प्राणी प्रातःकाल में अव्यक्त से व्यक्त होते हैं, अर्थात् सृष्टि का उत्पन्न होना होता है। जैसे सूर्य के उगमन के समय प्रकाश फैलता है, उसी तरह सभी प्राणी भी अव्यक्त से व्यक्त होकर जीवन यापन करते हैं।
इसके बाद श्लोक में कहा गया है कि रात्रि के आगमन पर वे फिर से अव्यक्त में लीन हो जाते हैं, अर्थात् सृष्टि का विलय होता है। जैसे सूर्य के अस्त होने पर अंधकार छाया देता है, उसी तरह सभी प्राणी भी अव्यक्त में लीन होते हैं।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि संपूर्ण सृष्टि एक चक्र में जन्म और विलय पाती है। इसका मतलब है कि सृष्टि का चक्र नित्य चलता रहता है, जन्म और मृत्यु का खेल हर जीवन के साथ चलता रहता है। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि सृष्टि का प्रक्रियावाद नित्य है और हमें इसे स्वीकार करके उसके साथ संतुलन में रहना चाहिए।