भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते। रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे॥19॥
Translation (HI)
हे पार्थ! यह भूतग्राम बार-बार उत्पन्न होता है और रात के आगमन पर लीन हो जाता है तथा दिन के समय फिर प्रकट होता है।
Life Lesson (HI)
संपूर्ण जीव प्रकृति के नियमों के अधीन होकर ही कार्य करते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को यह बता रहे हैं कि जैसे भूतग्राम बार-बार उत्पन्न होता है, फिर लीन हो जाता है, और फिर से प्रकट होता है, वैसे ही सभी जीव भी जन्म लेते हैं, मरते हैं, और पुनः जन्म लेते हैं। इसे भगवान का अनादि नियम कहा गया है।
इस श्लोक का जीवन संदेश है कि हम सभी जीव प्रकृति के नियमों और संक्रमणों के अनुसार अपने कर्मों को निभाते हैं। हमारा जन्म-मरण का चक्र चलता रहता है, परंतु हमें इस चक्र से मुक्ति प्राप्त करने के लिए अपने कर्मों को समझना और सही दिशा में उन्हें चलाना होगा। जब हम इस संसारिक चक्र के बाहर के मुक्ति की ओर अपने कर्मों के माध्यम से जाते हैं, तब ही हम संसार से मुक्त होते हैं।
इस श्लोक से हमें यह समझने को मिलता है कि हमें अपने कर्मों को ध्यान में रखकर सही दिशा में चलना चाहिए और अपने अध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयास करना चाहिए। इस संदेश के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण हमें अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए सही दिशा