भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्। उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति॥25॥
Translation (HI)
भीष्म, द्रोण और अन्य राजाओं के सामने कृष्ण ने कहा: हे पार्थ! इन कौरवों को देखो।
Life Lesson (HI)
कभी-कभी शत्रु भी हमारे निकट के लोग हो सकते हैं।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवद गीता महाभारत युद्ध के आरंभिक दृश्य का वर्णन करता है। युद्ध के पहले दिन, भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के रथ में खड़े होकर कौरवों की सेना को देखने के लिए उनसे कहते हैं। इसमें भीष्म और द्रोण जैसे महान योद्धाओं के साथ कौरवों की सेना की प्रमुखता को प्रकट किया गया है।
इस श्लोक का महत्व यह है कि यह हमें युद्ध के भयंकर महत्व को समझाता है। इसके माध्यम से हमें यह भी याद दिलाया जाता है कि शत्रु हमारे बाहर ही नहीं, अक्सर हमारे अंदर भी हो सकते हैं। इसलिए हमें सतर्क रहना चाहिए और हमेशा अपने शत्रुओं को पहचानने की क्षमता रखनी चाहिए।
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को संदेश देते हैं कि वे अपने शत्रुओं को देखें और उनसे सामना करने की तैयारी करें। इससे हमें यह सिखाई गई है कि जीवन में हर परिस्थिति का सामना करना अवश्यंक है और हमें उसके लिए तैयार रहना चाहिए।