निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव। न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे॥31॥
Translation (HI)
हे केशव! मैं शुभ की बजाय विपरीत लक्षण देख रहा हूँ। युद्ध में स्वजनों को मारकर कोई कल्याण नहीं दिखता।
Life Lesson (HI)
जब हम मोहग्रस्त होते हैं, तो हमें हर दिशा में अनिष्ट ही दिखता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि वे केवल अपने सुपुत्रों और स्वजनों के लिए क्षत्रिय दर्म के आधार पर युद्ध करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें उनके शत्रुओं को मारने के लिए उत्साह नहीं है। उन्हें मानवता के सिद्धांत पर चलकर युद्ध करने में कठिनाई हो रही है।
इस श्लोक का मुख्य संदेश है कि जब हमारा बुद्धि मोह और अज्ञान से अवरुद्ध होता है, तो हमें सही और गलत की भ्रांति हो जाती है। इससे हम अपने उद्देश्य और धर्म को भूल जाते हैं और गलत कार्य में प्रवृत्त हो जाते हैं। इसलिए, यह श्लोक हमें समझ जागरूक रहने और सही और गलत को समझने की महत्वपूर्णता बताता है।