यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः। धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्॥46॥
Translation (HI)
यदि शस्त्रधारी धृतराष्ट्रपुत्र रण में मुझे निःशस्त्र और प्रतिकार रहित देखकर मार दें, तो वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।
Life Lesson (HI)
कभी-कभी पराजय की शांति, हिंसा की विजय से अधिक मूल्यवान होती है।
Commentary (HI)
श्लोक 46 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अगर धृतराष्ट्र के पुत्रों में से कोई भी मुझे अस्त्र-शस्त्र से लदा हुआ और प्रतिकार के बिना रण भूमि में अवशिष्ट पाए, तो वह मुझे मार देने से मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा। इस श्लोक से हमें यह सिखाने का संदेश मिलता है कि कभी-कभी युद्ध में हारना और शांति की ओर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। युद्ध और हिंसा में नहीं, बल्कि शांति और सहिष्णुता में हमारा सच्चा विजय होता है। इस भावार्थ के माध्यम से हमें यह बोध होता है कि अहंकार और अभिमान के माध्यम से नहीं, विवेकपूर्वक और धर्म के मार्ग पर चलकर हमें अपनी जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त होती है।