हे महाबाहो! आपके इस अनेक मुखों, नेत्रों, हाथों, पैरों, पेटों और भयानक दाढ़ों वाले महान रूप को देखकर सभी लोक व्याकुल हो रहे हैं और मैं भी।
Life Lesson (HI)
ईश्वर का विराट रूप भय और विस्मय दोनों उत्पन्न करता है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपने विराट रूप का दर्शन करा रहे हैं। भगवान का यह रूप अत्यन्त भयानक और अद्भुत है। उनके इस रूप को देखकर अर्जुन के मन में भय और चकिति की भावना उत्पन्न हो रही है। भगवान की यह अद्भुत और विशाल रूप सभी लोगों को व्याकुल कर रहा है। इस दृश्य को देखकर अर्जुन के अलावा सभी लोग चिंतित हो रहे हैं।
इस श्लोक का मुख्य सन्देश है कि भगवान का विराट रूप मानव मनुष्य के समझ से परे है और उसका दर्शन भय और आश्चर्य दोनों की भावनाएं उत्पन्न कर सकता है। यह श्लोक हमें दिखाता है कि भगवान की महानता और शक्ति का हमारे मन से अत्यंत उदार और विस्मयकारी रूप है। इससे हमें भगवान के असीम गुणों और शक्तियों की महत्ता का अनुभव होता है और हम उनकी विशालता और अद्भुतता के सामने विनम्रता से आत्मसमर्पण करते हैं।