अर्जुन ने कहा: हे केशव! मैं प्रकृति, पुरुष, क्षेत्र (शरीर), क्षेत्रज्ञ (ज्ञाता), ज्ञान और ज्ञेय — इन सबको जानना चाहता हूँ।
Life Lesson (HI)
आत्मज्ञान की जिज्ञासा अध्यात्म मार्ग का प्रथम चरण है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण से कह रहे हैं कि वह चाहते हैं कि वे प्रकृति (प्राकृतिक प्रक्रिया), पुरुष (आत्मा), क्षेत्र (शरीर), क्षेत्रज्ञ (शरीर को जानने वाला आत्मा), ज्ञान (ज्ञान की प्रकार) और ज्ञेय (ज्ञायमान वस्तु) इन सभी विषयों को जानना चाहते हैं।
इस श्लोक से हमें यह सिखाई जाती है कि अध्यात्मिक जीवन में आत्मज्ञान की प्राप्ति कितनी महत्वपूर्ण है। अपने शरीर, मन, और आत्मा को समझने के माध्यम से हम अपने असली स्वरूप को समझ सकते हैं और जीवन में सच्चाई और धर्म का मार्ग चुन सकते हैं। इस प्रकार, यह श्लोक हमें आत्मज्ञान की महत्वपूर्णता को समझाता है और हमें आत्मा की अद्वितीयता को समझने की प्रेरणा देता है।