कुछ लोग आत्मा को ध्यान द्वारा आत्मा में देखते हैं, कुछ सांख्य योग से और अन्य लोग कर्म योग से उसे जानने का प्रयास करते हैं।
Life Lesson (HI)
हर मार्ग जो आत्मबोध की ओर ले जाए, योग है।
Commentary (HI)
इस श्लोक में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से भिन्न-भिन्न धार्मिक मार्गों की ओर इष्ट आचरण के विषय में बता रहे हैं। कुछ लोग आत्मा को ध्यान द्वारा आत्मा में देखते हैं, यहाँ 'ध्यान' का अर्थ है आत्म-स्वरूप में लगातार चिन्तन करना और आत्मा की स्वरूपता को समझना। दूसरे लोग सांख्य योग से आत्मा में अवगत होते हैं, यहाँ 'सांख्य योग' का अर्थ है तत्त्वज्ञान द्वारा आत्म-स्वरूप की जानकारी प्राप्त करना। और अन्य लोग कर्म योग से उसे जानने का प्रयास करते हैं, यहाँ 'कर्म योग' का अर्थ है निष्काम कर्म करके आत्मा का अनुभव करना।
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि जो भी मार्ग हम अपनाते हैं, उसमें आत्मबोध और आत्म-साक्षात्कार की दिशा में होना चाहिए। चाहे हम ज्ञान योग का अनुसरण करें, सांख्य योग का अभ्यास करें या कर्म योग का पालन करें, हमें अपनी आत्मा को समझने और उससे जुड़ने की प्रेरणा होनी चाहिए। इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण हमें